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उत्तर प्रदेश से 68 हजार तालाब और कुएं गायब

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नई दिल्ली में सूखे को लेकर बुलायी गई बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सूबे में 78 हजार जलस्रोतों को पुनर्जीवित करने और एक लाख नये तालाब बनाने की योजना पेश कर रहे थे। वहीं जल संरक्षण को लेकर मुख्यमंत्री के संजीदा इरादों से इतर कड़वा सच है कि आजादी के 68 वर्ष से अधिक समयावधि में प्रदेश में 68 हजार से ज्यादा तालाबों, पोखरों, झीलों और कुओं का वजूद मिट चुका है।

जीवन का पर्याय कहे जाने वाले जल के प्राकृतिक स्रोत सूबे में तेजी से विलुप्त हो रहे हैं। भू-माफिया व बिल्डर उन्हें पाटकर उनकी कब्र पर आलीशान इमारतें खड़ी कर रहे हैं। कंक्रीट के जंगल को विस्तार देने के लालच में उन पर बदनीयती से अवैध कब्जे करने का सिलसिला बेरोकटोक जारी है। गंगा के मैदान में बसे होने के बावजूद सूखे से जूझते उत्तर प्रदेश की यह विडंबनात्मक त्रासदी है। विकास की अंधी दौड़ और बेलगाम शहरीकरण के दुष्परिणाम की भयावह तस्वीर भी।

राजस्व दस्तावेजों में वर्ष 1947 में तालाबों, पोखर, झीलों और कुओं के रूप में जल के 8.91 लाख प्राकृतिक स्रोतों का ब्योरा दर्ज था। अनियोजित विकास के कुचक्र ने उनके अस्तित्व के लिए गंभीर संकट पैदा कर दिया है। राजस्व परिषद की रिपोर्ट के मुताबिक गुजरे 68 वर्ष से ज्यादा की समयावधि में अभिलेखों में दर्ज जल स्रोतों की संख्या घटकर 8.22 लाख रह गई है। 68 वर्ष में जल के 68 हजार से ज्यादा प्राकृतिक स्रोतों का नाम-ओ-निशान मिट चुका है। इस तथ्य को औसत की कसौटी पर परखें तो आजादी के बाद से अब तक हर साल सूबे में 1000 जल स्रोत अपना वजूद खोते रहे हैं।

प्रदेश में पानी के प्राकृतिक स्रोत पर भू-माफिया की गिद्ध दृष्टि किस कदर जमी हुई है इसका अंदाज लगाया जा सकता है 110950 तालाबों, पोखरों, झीलों व कुओं पर अवैध कब्जे पाये गए जिनका कुल क्षेत्रफल 18491 एकड़ है। सरकारी अभियानों के दौरान इनमें से लगभग 70 हजार जल स्रोतों को अवैध कब्जे से मुक्ति दिलाने का दावा किया गया है। बाकी 40 हजार जल भंडार अब भी अवैध कब्जे की गिरफ्त में हैं।

अस्तित्व की लड़ाई हारते प्राकृतिक जल स्रोतों के विलुप्त होने की वजह से पानी के इन भंडारों का दायरा भी कम हुआ है। आजादी के समय जल के इन भंडारों का कुल क्षेत्रफल 547046.9 एकड़ था जो अब घटकर 546216.9 एकड़ है। इस हिसाब से जल भंडारों का क्षेत्रफल 830 एकड़ घटा है। सुप्रीम कोर्ट हिचलाल तिवारी बनाम कमला देवी के मामले में सरकार को अवैध कब्जों का शिकार पानी के प्राकृतिक स्रोतों को उनके पुराने स्वरूप में बहाल करने का आदेश दे चुका है। हाई कोर्ट भी इस संदर्भ में शासन को फटकार लगा चुका है।

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